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झारखण्ड के प्रमुख साहित्य एवं साहित्यकार:-

 
झारखंड की कला एवं संस्कृति
झारखंड की कला एवं संस्कृति
  
  • एक कहानीकार, उपन्यासकार, हास्य व्यंग्यकार तथा नाटककार के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखनेवाले राधा कृष्ण का जन्म 18 सितम्बर, 1910 को हुआ था।
  • राधाकृष्ण का जन्म राँची में हुआ।
  • साहित्यकार सखाराम गणेश देवस्कर का जन्म झारखण्ड के देवघर जिले में हुआ था।
  • दैनिक ‘हितवाद’ का संपादन सखाराम गणेश देवस्कर ने किया। इनके द्वारा लिखित किताब देसर कथा थी, जिसे अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित किया गया था।
  • फादर डॉ. कामिल बुल्के भाषा साहित्य के स्तम्भ के रूप में याद किये जाते हैं।
  • बाईबिल का हिंदी में सर्वप्रथम अनुवाद फादर डॉ. कामिल बुल्के ने किया।
  • ‘अंग्रेजी – हिंदी शब्द कोष’ फादर डॉ० कामिल बुल्के की एक लोकप्रिय कृति है।
  • फादर डॉ. कामिल बुल्के संत जेवियर कॉलेज, राँची में हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे।
  • फादर डॉ० कामिल बुल्के को लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया।
  • डॉ. मनमसीह मुंडू पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने मुंडारी का शब्द कोष ‘मुंडारी डूड़ कोढारी’ तैयार किया ।
  • संक्षिप्त मुंडारी व्याकरण एवं मुंडारी-अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोष की रचना डॉ. मनमसीह मुंडू ने की ।
  • मुंडारी भाषा एवं साहित्य के लिए वर्ष 1999 का साहित्य अकादमी पुरस्कार डॉ. मनमसीह मुंडू को प्रदान किया गया ।
  • संथाली भाषा के जादुमनि बेसरा को उनकी कृति बमना के लिए 2005 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया ।
  • झारखण्ड के पाथरडीह (धनबाद) में जन्में हिंदी के चर्चित कवि ज्ञानेन्द्रपति को उनके काव्य संशयात्मा के लिए वर्ष 2006 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
 
  • ‘गायब होता हुआ देश’ उपन्यास के लेखक रणेन्द्र हैं।
  • ‘कोचे कड़बा’ नाटक के रचनाकार सोलेमान मुर्मू हैं।
  • ‘आदि धरम’ पुस्तक के लेखक रामदयाल मुण्डा- रतन सिंह मानकी
  • ‘नागवंशावली’ के रचनाकार बेनीराम महथा हैं।
  • नोट्स ऑफ दि गँवारी डालेक्ट ऑफ लोहरदगा छोटानागपुर (व्याकरण) के रचनाकार ई. एच. हिव्टली हैं।
  • ‘सेवा और नौकरी’, ‘तेतर की’ छांह के रचनाकार श्रवण कुमार गोस्वामी हैं।
  • ‘मरंड. गोमके: जयपाल सिंह’, ‘महाराजा मदरा मुंडा’ के रचनाकार गिरिधारी राम गोंझू हैं।
  • ‘करम गीत’ के रचनाकार बुधु भगत हैं।
  • संथाली भाषा पर लिखी गई प्रथम पुस्तक ‘एन इंट्रोडक्सन टू द संथाल लैंग्वेज के लेखक जे. फिलिप्स हैं।
  • ‘मेटिरियल्स फॉर ए संथाली ग्रामर’ एवं ‘ए संथाली डिक्शनरी’ के लेखक पी०ओ०बोडिंग हैं।
  • प्रथम संथाली शब्दकोश ‘ए वोकेब्युलरी ऑफ दि संथाली लैंग्वेज’ के रचनाकार ई.एल. पक्सुले हैं।
  • ‘देवनागरी लिपि में संथाली प्रवेशिका’ की रचना डोमन साहू समीर ने की।
  • ‘ओनोंडहें बाहा डालवाक’ कविता संग्रह के लेखक पाल जूझार सोरेन हैं।
  • संथाली लोक गीतों का संग्रह होड़ सेरेञ एवं दोड़ सेरेञ की रचना डब्लू. जी. आर्चर ने की हैं।
  • संथाली लोक कथाओं का संग्रह ‘होड कहानी को’ एवं ‘गाम’ पी०ओ०बोडिंग की कृति है।
  • संथाली भाषा का प्रथम उपन्यास ‘हाड़मवाक् आतो’ की रचना आर. कारटैयर्स ने की है।
  • संथाली भाषा के उपन्यास ‘मुहिला चेचेत दाई’ के उपन्यासकार नन्कू सोरेन है।
  • देवनागरी लिपि में लिखी गई प्रथम संथाली कथा-संग्रह ‘कुकम्’ बाल किशोर वासु की रचना है।
  • संथाली भाषा साहित्य का प्रथम साहित्यिक नाटक ‘विदू-चांदन’ तथा ‘खेरवार बीर’ के लेखक रघुनाथ मुर्मू हैं।
  • नागपुरी रचना ‘बृहद – संग्रह’ के रचनाकार डॉ० विशेश्वर प्रसाद केसरी हैं।
  • मेघदूत, दिव्य ज्योति के रचनाकार श्री निवास पानुरी हैं।
  • बिरसा भगवान् की रचना धनपत महतो ने की है।
  • खोरठा साहित्य के ‘डाह नाटक’ के रचनाकार सुकुमारजी हैं।
  • पंचपरगनिया साहित्य ‘ताल मंजरी’ के रचनाकार उपेन्द्र नाथ सिंह हैं।
  • कुरमाली साहित्य ‘करमालिक धंधर’ के रचनाकार चंडीदास हैं।
  • ‘खल्ली अयंग’ के रचनाकार इंद्रजीत उराँव हैं।
  • हो साहित्य ‘हो दूरंग’ के रचनाकार डब्लू. जी. आर्चर हैं।
  • हो साहित्य ‘रूमल’ के रचनाकार श्री सतीश कोड़ा सेंगल हैं।
  • ब्रीफ ग्रामर एवं वोकेबुलरी ऑफ उरांव लैंग्वेज के रचनाकार एफ. बैच हैं।
  • पूरखा, लड़ाके, किसका राज है, झारखण्ड एवं अंतहीन, सागर गाचा, अमुर, सिरिंग, आदिम राग आदि खड़िया पुस्तकों की रचना वंदना टेटे ने की है।
  • हो भाषा और साहित्य का इतिहास के रचनाकार डॉ०आदित्य प्रसाद सिन्हा हैं।
  • खड़िया साहित्य ‘इंट्रोडक्शन टू खड़िया लैंग्वेज’ के रचनाकार जी.सी. बनर्जी हैं।
  • रामलीला, सजला, गेंद और गोल, गल्पिका (सभी कहानी-संग्रह) फुटपाथ, रूपांतर, बोगस (उपन्यास), भारत छोड़ो, बिगड़ी हुई बात (नाटक) समय, पति सुधार केन्द्र के रचनाकार राधाकृष्ण हैं।
 
  • ‘हमारी माँगें पूरी करो’ श्रवण कुमार गोस्वामी की रचना हैं।
  • ‘खेरवाल बांशो धोरोम पुथी’ की रचना मांझी रामदास टुडु ने की है।
  • बजीरा, पानी पिता, संझावती, बज्जिका वरवै रामायन बेचारा केवट व उदास डीहकथा के रचनाकार दिनेश्वर प्रसाद हैं।
  • द झारखण्ड मूवमेंट रेट्रोसपेक्ट एंड प्रोस्पेक्ट, आदि धरम, आदिवासी अस्तित्व और झारखण्डी अस्मिता के सवाल के रचनाकार राम दयाल मुंडा हैं।
  • ‘तुलिका’ डॉ० आदित्य प्रसाद सिन्हा की रचना है।
  • ‘ए हिस्टोरिकल आउट लाइन ऑफ प्रि-ब्रिटिश छोटानागपुर’ के रचनाकार मानगोविंद बनर्जी हैं।
  • पुस्तक “मारंग घोड़ा नीलकंठ हुआ” तथा ‘मै बोरिशिल्ला’ के लेखक महुआ माँझी है।
  • “मुंडारी लोक कथाएँ” पुस्तक की रचना जगदीश त्रिगुणायत ने की है।
  • साहित्य अकादमी से पुरस्कृत पुस्तक ‘राही रावण काना’ भोगला सोरेन की कृति है।
  • बिरसा मुंडा के “उलगुलान’ पर आधारित पुस्तक “आरण्येर अधिकार’ की रचना महाश्वेता देवी ने की है।
  • “स्वराज्य लुट गया’ पुस्तक के लेखक राम नारायण सिंह हैं।
  • ‘मुंडारी इनसाइक्लोपेडिया’ पुस्तक के लेखक फादर हॉफमैन हैं।
  • 2005 ई० में साहित्य अकादमी प्राप्त पुस्तक ‘कुडुख डंडी’ के लेखक बिहारी लकड़ा हैं।
  • ‘मुंडारी डूड कोढारी’ के लेखक मनमसीह मुंडु हैं।
  • ‘प्रीती बाला’ बुदु बाबू की रचना है।
  • प्रसिद्ध पुस्तक ‘पाथेर पँचाली’ के लेखक विभूति भूषण हैं।
  • ‘Dark Horse’ की रचना नीलोत्पल मृणाल ने की है।
  • “The Oraon of Chhotanagpur” के लेखक शरतचंद्र रॉय हैं।
  • “The Khadia’s की रचना शरतचंद्र रॉय ने की है।
  • “The Munda’sAnd thier country” नामक पुस्तक की रचना शरतचंद्र रॉय ने की है।
  • ‘तिलकेर मुकदमा’ के रचनाकार सखाराम गणेश देउस्कर हैं।
  • The Edge of Power, The Edge of Desire, of loveAnd Politics, That thing called Love, The Caption (formerly 22 Yards), Let The reason Be love तथा Daddy, ये सभी तुहिन सिन्हा की रचनाएं हैं।
  • Love At facebook निकिता सिंह की रचना है।
  • आदिवासी पत्रिका की शुरूआत 1915 ई० में हुई।
  • झारखण्ड की प्रथम आदिवासी लेखिका एलिसा एक्का हैं।

जनजातीय साहित्य

 
  • जनजातीय साहित्य में सर्वाधिक प्रचलन लोक कथाओं का है ।
  • मुंडाओं की प्रसिद्ध कथा ‘सोसो बोंगा’ बैलेट के रूप में गढ़ी गयी है ।
  • संथालों की कहानियों के मुख्य पात्र जंगली पशु होते हैं ।
  • इनसाइक्लोपीडिया मुंडारिका मुंडारी भाषा एवं साहित्य का विश्वकोष माना जाता है।
  • इनसाइक्लोपीडिया मुंडारिका के लेखक फादर हॉफमैन हैं।
  • मुंडारी प्राइमर के लेखक जे. सी. हिवटली हैं|
  • मुंडारी ग्रामर के लेखक ए. नोट्रटोट्ट है ।
  • शरतचन्द्र राय ने ‘मुंडाज एण्ड देयर कंट्री’ नामक पुस्तक 1912 ई. में लिखा ।
  • डॉ. मनमसीह मुंडु को मुंडारी डूड को ठारि पुस्तक पर 2000 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ।
  • बाईबल का मुंडारी में अनुवाद ए. नोट्रोट्ट ने किया ।
  • प्रीति बाला (गीत) के लेखक बुदू बाबू हैं|
  • संथाली भाषा पर लिखी गयी प्रथम पुस्तक एन इंट्रोडक्शन टू दि संथाल लैंग्वेज है।
  • एन इंट्रोडक्शन टू दि संथाल लैग्वेज के लेखक जर्मिया फिलिप्स थे
  • ‘संथाली इंग्लिश एण्ड इंग्लिश संथाली’ शब्दकोश के रचनाकार डॉ. एंडू कैंपबेल थे।
  • 1947 ई. में देवनागरी लिपि में संथाली का प्रथम समाचार पत्र होड संवाद प्रकाशित हुआ।
  • संथाली प्रवेशिका के लेखक डोमन साहू समीर हैं|
  • ‘ग्रामर ऑफ द कोल’ पुस्तक के लेखक रेव ए. नोट्रोट हैं।
  • हो दुरं के लेखक डब्लू. जी. आर्चर हैं |
  • ‘इन्ट्रोडक्शन टू द खड़िया लैग्वेज’ नामक पुस्तक के लेखक गगन चन्द्र बनर्जी हैं।
  • ‘द खडियाज’ के लेखक शरद चन्द्र राय हैं|
  • पचास गीतों की पुस्तक कुडुख-डण्डी के रचनाकार बिहारी लकड़ा हैं |
  • बिहारी लकड़ा को 2005 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया ।
  • बाईबिल का कुडुख में अनुवाद रेव फर्ड हॉन ने किया ।
  • ‘एन इण्ट्रोडक्शन टू दि हो लैंग्वेज’ के लेखक फादर जॉन डीनी एस. जे. हैं |
  • बाईबिल का नागपुरी में अनुवाद पी. इड्नेस ने किया ।
  • बाईबिल का हिंदी में अनुवाद फादर कामिले बुल्के ने किया ।
  

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