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झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रमुख व्यक्तित्व

 Freedom fighter and prominent personality of Jharkhand 

तिलका माँझी:-

 
  • भारतीय स्वाधीनता संग्राम के पहले विद्रोही शहीद तिलका माँझी थे।
  • तिलका माँझी का जन्म 11 फरवरी, 1750 ई. को हुआ था ।
  • तिलका माँझी का जन्म तिलकपुर गाँव में हुआ था ।
  • तिलका माँझी का जन्म संथाल परिवार में हुआ था ।
  • तिलका माँझी को जाबरा पहाड़िया के नाम से भी जाना जाता है|
  • तिलका माँझी के पिता का नाम सुंदरा मुर्मू था।
  • तिलका आंदोलन का नेतृत्व तिलका माँझी ने किया था।
  • तिलका माँझी के विद्रोह का मुख्य केन्द्र वनचरीजोर (भागलपुर) था।
  • राजमहल के सुपरिटेंडेंट क्लीवलैंड को तिलका माँझी ने 13 जनवरी, 1784 को अपने तीरों से मार गिराया ।
  • तिलका माँझी द्वारा गांव में विद्रोह का संदेश सखुआ पत्ते के माध्यम से भेजा जाता था।
  • तिलका माँझी को पकड़वाने वाला पहाड़िया सरदार जउराह था ।
  • तिलका माँझी को 1785 ई. में गिरफ्तार किया गया|
  • तिलका माँझी को भागलपुर में फाँसी दी गई ।
  • तिलका माँझी को भागलपुर में बरगद के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गई थी ।
 

बुधु भगत :-

 
  • कोल विद्रोह के नायक बुधु भगत का जन्म 17 फरवरी, 1792 ई. को हुआ था ।
  • बुधु भगत का जन्म राँची जिले के चान्हो प्रखण्ड के सिलागाई गाँव में हुआ था।
  • सिलागाई कोयल नदी के तट पर बसा है ।
  • बुधु भगत का जन्म उरांव परिवार में हुआ था।
  • बुधु भगत ने ब्रिटिश शासन के विरूद्ध कोल विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • झारखण्ड के प्रथम आंदोलनकारी बुधु भगत थे जिन्हें पकड़ने के लिए अंग्रेज सरकार को 1000 रुपये इनाम की घोषणा करनी पड़ी।
  • 14 फरवरी, 1832 ई. को कप्तान इम्पे के नेतृत्व में आए सैनिकों के खिलाफ लड़ते हुए बुधु भगत शहीद हुए ।

सिदो-कान्हू:-

  
  • सिदो-कान्हू का जन्म संथाल परिवार में हुआ था ।
  • सिदो-कान्हू का जन्म संथाल परगना के भोगनाडीह गांव में हुआ था।
  • सिदो का जन्म 1815 ई. में हुआ था ।
  • कान्हू का जन्म 1820 ई. में हुआ ।
  • चाँद का जन्म 1825 ई. में हुआ था ।
  • भैरव का जन्म 1835 ई. में हुआ था ।
  • सिदो-कान्हू के पिता का नाम चुन्नी माँझी था ।
  • सिदो-कान्हू ने 1855 ई. में ब्रिटिश सत्ता, साहूकारों, व्यापारियों व जमींदारों के खिलाफ संथाल विद्रोह (हूल आंदोलन) का नेतृत्व किया था।
  • संथाल विद्रोह में सक्रिय भागीदारी निभानेवाले चाँद एवं भैरव सिदो-कान्हू के भाई थे।
  • 30 जून, 1855 को भोगनाडीह की सभा में सिदो को राजा, कान्हू को मंत्री, चाँद को प्रशासक तथा भैरव को सेनापति चुना गया ।
  • संथाल विद्रोह का मुख्य नारा था – करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो ।
  • सिदो अपने दैवी शक्ति का हवाला देते हुए सभी मांझियों को साल की टहनी भेजकर संथाल हूल के लिए तैयार रहने को कहा ।
  • बरहाइत के लड़ाई में चाँद – भैरव शहीद हो गये ।
  • सिदो -कान्हू को बरहाइत में फाँसी दी गयी थी।
  • ‘हूल दिवस’ 30 जून को मनाया जाता है ।

तेलंगा खड़िया:-

  
  • अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करनेवाले तेलंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी, 1806 को हुआ था।
  • तेलंगा खड़िया का जन्म गुमला जिला के मुर्ग (सिसई) गांव में हुआ था |
  • तेलंगा खड़िया के पिता का नाम दुईया खड़िया था ।
  • तेलंगा खड़िया के पिता नागवंशी महाराजा के भण्डारी थे ।
  • तेलंगा खड़िया के माता का नाम पेतो खड़िया था।
  • तेलंगा खड़िया का विवाह 1846 ई. में रतनी खड़िया के साथ हुआ था |
  • तेलंगा खड़िया ने अंग्रेजों, जमींदारों तथा अन्य अत्याचारियों से लड़ने हेतु गुमला के आसपास के गांवों में अपना संगठन बनाया था अपने संगठन को ये जुरी पंचायत कहते थे ।
  • तेलंगा खड़िया को बसिया थानान्तर्गत कुम्हारी ग्राम के जुरी पंचायत में समर्थको को संबोधित करते समय गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के पश्चात उन्हें कलकता जेल भेज दिया गया |
  • 23 अप्रैल, 1880 को बोधन सिंह ने गोली मारकर तेलंगा खड़िया की हत्या कर दी।
  • जिस स्थल पर तेलंगा खड़िया की लाश को दफनाया गया था वह स्थल आज तेलंगा तोपा टांड के नाम से जाना जाता है
  

ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव:-

  
  • 1857 के विद्रोह के नायक ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का जन्म 12 अगस्त, 1817 ई. को हुआ था ।
  • बड़कागढ़ की राजधानी सतरंजी में ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का जन्म हुआ था।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के पिता का नाम रघुनाथ शाहदेव था ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के माता का नाम वाणेश्वरी कुंवर था ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने अपनी राजधानी सतरंजी से हटाकर हटिया को बनाया |
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने 1855 ई. में अंग्रेजों के विरूद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका तथा स्वयं को एक स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया ।
  • 1857 के सिपाही विद्रोह में रामगढ़ बटालियन के 600 सिपाहियों का नेतृत्व ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने किया ।
  • मुक्तिवाहिनी सेवा के संस्थापक ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव थे ।
  • मुक्तिवाहिनी सेना का सेनापति पाण्डेय गणपत राय को नियुक्त किया गया था ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को 23 मार्च, 1858 ई. को गिरफ्तार किया गया ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को लोहरदगा में गिरफ्तार किया गया ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को विश्वनाथ दुबे ने विश्वासघात कर गिरफ्तार करवाया था।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव एवं पाण्डेय गणपत राय को गिरफ्तार करने में कैप्टन नेशन नामक अंग्रेजी सेनानायक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को 16 अप्रैल, 1858 को राँची में जिला स्कूल के मुख्य द्वार के पास जहां इन दिनों शहीद स्थल बना हुआ है, फाँसी दे दी गयी ।
  • ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को कदम वृक्ष पर लटकाकर फांसी दी गयी थी|
  

पाण्डेय गणपत राय:-

   
  • 1857 ई. के सिपाही विद्रोह के अमर सेनानी पाण्डेय गणपत राय का जन्म 17 जनवरी, 1809 ई. में को हुआ था।
  • पाण्डेय गणपत राय का जन्म लोहरदगा जिले के भौंरो गांव में हुआ था।
  • पाण्डेय गणपत राय के पिता का नाम रामकिसुन राय था ।
  • पाण्डेय गणपत राय की पत्नी का नाम सुगंधा कुंवर था ।
  • पाण्डेय गणपत राय छोटानागपुर के महाराज के दिवान थे।
  • 1857 के विद्रोहियों ने पाण्डेय गणपत राय को अपना सेनानायक बनाया था ।
  • पाण्डेय गणपत राय ने 1857 के विद्रोह में ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के साथ मिलकर भाग लिया ।
  • पाण्डेय गणपत राय को परहेपाट के जमींदार महेश शाही ने विश्वासघात कर गिरफ्तार करवाया था ।
  • पाण्डेय गणपत राय को गिरफ्तार करनेवाला अंग्रेज अधिकारी कैप्टन नेशन था।
  • पाण्डेय गणपत राय को 21 अप्रैल, 1858 को राँची जिला स्कूल के मुख्य द्वारा के पास स्थित कदम वृक्ष पर लटकाकर फाँसी दी गयी थी ।
 

टिकैत उमराव सिंह:-

  
  • 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के समक्ष कड़ी चुनौती पेश करने वाले टिकैत उमराव सिंह का जन्म राँची जिले के ओरमांझी प्रखण्ड के खटंगा गांव में हुआ था ।
  • टिकैत उमराव सिंह का संबंध बंधगांव राजपरिवार से था ।
  • टिकैत उमराव सिंह 12 गांव के राजा थे।
  • 1857 का विद्रोह के समय टिकैत उमराव सिंह, उनके छोटे भाई टिकैत घाँसी सिंह तथा दीवान शेख भिखारी तीनों ने मिलकर चुटुपालू तथा चारू घाटी में अंग्रेज सेना को प्रवेश करने से रोक दिया था ।
  • 1857 के विद्रोह के दौरान टिकैत उमराव सिंह के भाई घाँसी सिंह को गिरफ्तार कर लोहरदगा के जेल में डाल दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गयी थी ।
  • टिकैत उमराव सिंह को शेख भिखारी के साथ 6 जनवरी, 1858 को गिरफ्तार कर 8 जनवरी, 1858 को फाँसी दे दी गयी ।
  • टिकैत उमरावं सिंह को चूटुपालू घाटी में फाँसी दी गयी थी ।
  • टिकैत उमराव सिंह को वट वृक्ष पर लटकाकर फाँसी दी गयी थी।
  • टिकैत उमराव सिंह को विलियम ऑक्स के मौखिक आदेश पर फाँसी दी गयी थी ।
  

शेख भिखारी:-

 
  • 1857 के विद्रोह के नायक शेख भिखारी का जन्म 1819 ई. में हुआ था ।
  • शेख भिखारी का जन्म राँची जिला के ओरमांझी थाना के खुदिया गांव में हुआ था।
  • शेख भिखारी के पिता का नाम शेख पहलवान था ।
  • शेख भिखारी टिकैत उमराव सिंह के दीवान थे ।
  • शेख भिखारी ने टिकैत उमराव सिंह के साथ मिलकर 1857 के विद्रोह में भाग लिया।
  • 1857 के विद्रोह में शेख भिखारी ने अंग्रेज फौज को रोकने के लिए चुटुपालू के मार्ग को अवरूद्ध किया था ।
  • 1857 के विद्रोह के दौरान संथाल विद्रोहियों से शेख भिखारी ने संपर्क कर उन्हें विद्रोह के लिए प्रेरित किया ।
  • शेख भिखारी को 8 जनवरी, 1858 को फाँसी दी गयी ।
  • शेख भिखारी को चुटुपालू घाटी में वट वृक्ष पर लटकाकर फाँसी दी गयी थी ।
 

नीलाम्बर-पीताम्बर:-

 
  • 1857 के विद्रोह में पलामू के भोक्ता नेता नीलाम्बर-पीताम्बर ने अंग्रेजी सत्ता को हिलाकर रख दिया ।
  • भोक्ता खरवार जनजाति की उप-जाति या शाखा है|
  • 1857 के विद्रोह में नीलाम्बर-पीताम्बर का साथ चेरो जनजाति ने दिया।
  • पलामू में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व नीलाम्बर-पीताम्बर ने किया।
  • नीलाम्बर-पीताम्बर गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे।
  • 1857 के विद्रोह में नीलाम्बर-पीताम्बर ने चेरो राजाओं के साथ मिलकर भाग लिया।
  • नीलाम्बर-पीताम्बर दोनों सगे भाई थे ।
  • 21 अक्टूबर, 1857 को नीलाम्बर-पीताम्बर ने चैनपुर, शाहपुर तथा लेस्लीगंज पर आक्रमण कर अंग्रेजों के विरूद्ध जंग का ऐलान किया ।
  • 13 फरवरी, 1858 को भोगता सरदार के चेमो गढ़ पर डाल्टन द्वारा हमला किया गया।
  • भोगता सरदार नीलाम्बर-पीताम्बर शाहाबाद के विद्रोहियों से मिल गये थे|
  • शाहाबाद के बाबू अमर सिंह का पदार्पण खरौंधी (पलामू) में हुआ था।
  • नीलाम्बर-पीताम्बर की गिरफ्तारी डालटन के द्वारा की गयी थी ।
  • नीलाम्बर-पीताम्बर को 28 मार्च 1859 को फाँसी दी गयी थी ।
  • नीलाम्बर-पीताम्बर को लेस्लीगंज में आम के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गयी ।
 

बिरसा मुंडा:-

 
  • बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर, 1875 को हुआ था ।
  • बिरसा मुंडा का जन्म वृहस्पतिवार के दिन हुआ था ।
  • बिरसा मुंडा का जन्म उलिहातू गांव में हुआ था ।
  • 15 नवम्बर, 1875 को जन्में बिरसा मुंडा का जन्म स्थान खूंटी जिले में है।
  • बिरसा मुंडा के पिता का नाम सुगना मुंडा था।
  • बिरसा मुंडा की माता का नाम करमी था ।
  • बिरसा मुंडा पांच भाई थे कोन्ता, दस्कीर, चम्पा, बिरसा एवं कानू ।
  • बिरसा अपने माता-पिता के चौथे पुत्र थे ।|
  • बिरसा मुंडा का परिवार ईसाई था।
  • बचपन में बिरसा सरना से ईसाई धर्म में दीक्षित हुए।
  • ईसाई धर्म में दीक्षित होने के बाद बिरसा के पिता का नाम मसीहदास रखा गया था।
  • ईसाई धर्म ग्रहण करते समय बिरसा का नाम दाऊद रखा गया था।
  • बिरसा का ईसाई धर्म में कन्फर्मेशन 7 मई, 1886 को चाईबासा लुथेरन के मिशन में हुआ था।
  • बिरसा मुंडा का प्रारंभिक शिक्षा सलगा स्कूल में हुई।
  • बिरसा मुंडा ने अपर प्राइमरी शिक्षा लिए बुर्जू मिशन स्कूल में अपना नाम लिखवाया ।
  • बिरसा ने चाईबासा में रहकर उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त की।
  • बिरसा को प्रारंभिक शिक्षा जयपाल नाग ने दी।
  • बिरसा पेशे से बुनकर थे|
  • बिरसा मुंडा अपने धर्म, विशेषकर वैष्णव धर्म पर बल देते थे |
  • बिरसा मुंडा पूर्णतया वैष्णव हो गये थे ।
  • बिरसा मुंडा जनेऊ, खड़ाऊ और हल्दी के रंग में रंगी धोती पहनते थे ।
  • जनेऊ पहनने की शिक्षा मुंडाओं को बिरसा मुंडा ने दी।
  • बिरसा मुंडा आदिवासियों से सिंगबोंगा की पूजा करने के लिए कहा करते थे।
  • बिरसा मुंडा ने अपने आपको सिंगबोंगा का दूत बताया ।
  • बिरसाईत धर्म को बिरसा मुंडा ने चलाया ।
  • बिरसा मुंडा ने 1895 ई. में अपने आपको ईश्वर का दूत घोषित किया ।
  • बिरसा मुंडा को सबसे पहले भगवान थानेदार मृत्युंजय नाथ लाल ने कहा था ।
  • बिरसा मुंडा को प्रथम बार 1895 ई. में गिरफ्तार किया गया ।
  • 30 नवम्बर, 1897 ई. को विक्टोरिया के हीरक जयंती के अवसर पर बिरसा मुंडा को जेल से छोड़ दिया गया ।
  • बिरसा मुंडा के आंदोलन का मुख्यालय खूँटी था ।
  • बिरसा आंदोलन समय राँची का उपायुक्त स्ट्रीटफील्डथा ।
  • डोम्बारी पहाड़ बिरसा आंदोलन का केन्द्र बिंदु था ।
  • बिरसा मुंडा 3 फरवरी, 1900 को गिरफ्तार किये गये ।
  • 3 फरवरी, 1900 ई. को बंदगाव के जगमोहन सिंह के आदमी वीर सिंह महली आदि ने 500 रुपये ईनाम के लालच में बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करवा दिया ।
  • बिरसा मुंडा के गिरफ्तारी पर 500 रुपये का ईनाम रखा गया था।
  • बिरसा मुंडा की मृत्यु 9 जून, 1900 को हुई ।
  • बिरसा मुंडा की मृत्यु हैजा बीमारी की वजह से हुई ।
  • बिरसा मुंडा की मृत्यु राँची जेल में हुई ।
  • बिरसा मुंडा को 9 जून, 1900 को राँची के कोकर स्थित राँची डिस्टीलरी के निकट एक नाले के किनारे दफना दिया गया था, जहाँ एक स्मारक बना दिया गया है|
  • झारखण्ड क्षेत्र की व्यथा समझनेवाले प्रथम आदिवासी नेता बिरसा मुंडा थे ।
  • झारखण्ड राज्य के गठन के इतिहास का ‘महानायक’ बिरसा मुंडा को माना जाता है।
  • महान आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को दाउद मुंडा, दाउद बिरसा, बिरसा भगवान कहा जाता है|
  • बिरसा मुंडा को आम जनजातियाँ धरती आबा एवं भगवान कहती है।
 

गया मुंडा:-

  
  • ‘मुंडा विद्रोह’ के दूसरे अग्रणी नेता गया मुंडा थे।
  • गया मुंडा बिरसा मुंडा के सेनानायक थे ।
  • गया मुंडा खूँटी जिले के ऐटकडीह गांव के रहनेवाले थे ।
  • ऐटकडीह तजना नदी के तट पर स्थित है।
  • गया मुंडा के हाथो मारा जानेवाला सिपाही जयराम था ।
  • राँची के डिप्टी कमिश्नर स्ट्रीटफील्ड गया मुंडा को गिरफ्तार करने 6 जनवरी, 1900 को उसके गांव ऐटकेडीह पहुँचे।
  • गया मुंडा और उसके मंझले पुत्र सानरे मुंडा को 22 अक्टूबर, 1901 को फाँसी दी गयी|
  • गया मुंडा के पुत्र डोंका मुंडा को आजीवन कारावास की सजा दी गयी ।
  • आजीवन देश निर्वासन का दंड पाया जयमासी गया मुंडा का बेटा था ।
  • गया मुंडा की पत्नी माकी को 2 वर्ष को कारावास की सजा मिला।
 

जतरा भगत:-

 
  • टाना भगत आंदोलन के नेता जतरा भगत का जन्म 1888 ई. में हुआ था ।
  • जतरा भगत का जन्म गुमला जिला के बिशुनपुर प्रखंड के चिंगरी नवाटोली गांव में हुआ था ।
  • जतरा भगत का जन्म उरांव परिवार में हुआ था ।
  • जतरा भगत के पिता का नाम कोडल उरांव था ।
  • जतरा भगत की माता का नाम लिबरी था ।
  • जतरा भगत की पत्नी का नाम बुधनी था ।
  • झारखण्ड क्षेत्र के टाना भगत आंदोलन से जतरा उरांव संबंधित थे ।
  • टाना भगत आंदोलन मूलतः धार्मिक एवं राजनीतिक आंदोलन था ।
  • टाना उरांव जनजाति की एक शाखा है ।
  • टाना भगतों के आंगन में तुलसी चौरा और सफेद झण्डा आवश्यक है।
  • टाना भगत सत्य और अहिंसा की प्रतिमूर्ति होते हैं |
  • खादी का वस्त्र और खादी का तिरंगा टाना भगतों के जीवन संगी हैं |
  • जतरा भगत ने अपना आंदोलन 1914 ई. में प्रारंभ किया ।
  • जतरा भगत ने उरांव लोगों के बीच मंदिरा पान न करने, मांस न खाने, जीव हत्या नहीं करने, यज्ञोपवीत धारण करने, अपने-अपने घरों के आंगन में तुलसी चौरा स्थापित करने, बैठ-बेगारी समाप्त करने, अंग्रेजों के आदेश को न मानने, खेतों में गुरुवार को हल चलाना बंद करने का उपदेश दिया ।
  • जतरा भगत को 1916 ई. गिरफ्तार किया गया ।
  • जतरा भगत को गिरफ्तार करने के पश्चात राँची के जेल में रखा गया ।
  • जतरा भगत की मृत्यु 1917 ई. हुई।

बाबू राम नारायण सिंह:-

  
  • स्वतंत्रता सेनानी बाबू राम नारायण सिंह का जन्म 19 दिसम्बर, 1885 ई. को हुआ था।
  • राम नारायण सिंह का जन्म चतरा जिले के तेतरिया गांव में हुआ था ।
  • राम नारायण सिंह के पिता का नाम भोली सिंह था ।
  • राम नारायण सिंह ने मैट्रीक की परीक्षा हजारीबाग के जिला स्कूल से पास की।
  • राम नारायण सिंह ने आई.ए. की परीक्षा संत जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से पास की।
  • राम नारायण सिंह ने बी.ए. की शिक्षा रिपन कॉलेज, कोलकाता से प्राप्त की ।
  • राम नारायण सिंह ने लॉ की डिग्री पटना से प्राप्त की ।
  • राम नारायण सिंह 1913 ई. में असिस्टेंट सेटलमेंट ऑफिसर नियुक्त हुए। इस पद से उन्होंने 1915 ई. में इस्तीफा दे दिया।
  • राम नारायण सिंह 1920 ई. में पटना में वकालत शुरू की पुनः चतरा में वकालत प्रारंभ किया |
  • 1921 ई. में वकालत छोड़कर असहयोग आंदोलन में कूद पड़े।
  • राम नारायण सिंह 1924 ई. में हजारीबाग जिला बोर्ड के प्रथम निर्वाचित उपाध्यक्ष चुने गये जिस पर वे 1946 तक रहे|
  • राम नारायण सिंह 1927 ई. में इंडियन लेजिस्लेटिव एसेंबली (केंद्रीय धारा सभा) के सदस्य बने जिसपर वे 1946 ई. तक रहे|
  • राम नारायण सिंह 1946 ई. में संविधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए |
  • 1952 के लोक सभा चुनाव में राम नारायण सिंह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए।
  • ‘स्वराज्य लूट गया’ पुस्तक के रचयिता राम नारायण सिंह हैं|
  • ‘छोटानागपुर केसरी’ के नाम से राम नारायण सिंह जाने जाते हैं ।
  • 18 मार्च, 1940 को रामगढ़ में काँग्रेस के 53वें अधिवेशन में राम नारायण सिंह को महात्मा गांधी ने छोटानागपुर केसरी की उपाधि से अलंकृत किया ।
  • योग विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए दिल्ली में ‘योगाश्रम’ की स्थापना राम नारायण सिंह ने की ।
  • अलग राज्य झारखण्ड की लड़ाई संसद में लड़ने वाले बाबू राम नारायण सिंह का निधन 24 जून, 1964 ई. को हुआ।
  

श्रीमती सरस्वती देवी:-

 
  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभानेवाली श्रीमती सरस्वती देवी का जन्म 5 फरवरी, 1901 ई. को हुआ था।
  • श्रीमती सरस्वती देवी का जन्म हजारीबाग में हुआ था।
  • श्रीमती सरस्वती देवी के पिता का नाम प्रो. विष्णु दयाल लाल सिन्हा था।
  • श्रीमती सरस्वती देवी ने पर्दा-प्रथा उन्मूलन हेतु आंदोलन का नेतृत्व 1928 ई. में किया।
  • जेल जानेवाली हजारीबाग की पहली महिला सरस्वती देवी थी जिन्हे 26 जनवरी, 1930 ई. को झंडोत्तोलन के आरोप में जेल जाना पड़ा।
  • श्रीमती सरस्वती देवी 1937 ई. में भागलपुर जिले के विधान सभा क्षेत्र से विजयी हुई।
  • भारत छोड़ो आंदोलन का श्रीगणेश हजारीबाग में 11 अगस्त, 1942 ई. को सरस्वती देवी के नेतृत्व में हुआ ।
  • 11 अगस्त, 1942 को श्रीमती सरस्वती देवी को गिरफ्तार कर भागलपुर जेल में भेजा गया ।
  • श्रीमती सरस्वती देवी का निधन 10 दिसम्बर, 1958 ई. को हुआ ।
 

सुखलाल सिंह:-

 
  • राष्ट्रीय आंदोलन में चतरा एवं हजारीबाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले सुखलाल सिंह का जन्म 3 जून, 1897 ई. को हुआ था ।
  • सुखलाल सिंह ने स्नातक की शिक्षा बी. एन. कॉलेज, पटना से प्राप्त की ।
  • सुखलाल सिंह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी राम नारायण सिंह के भाई थे ।
  • असहयोग आंदोलन के शुरूआती दौर में सुखलाल सिंह चतरा में बंदी बनाये गये ।
  • सुखलाल सिंह 1934 ई. में डिस्ट्रीक बोर्ड के निर्वाचित चेयरमैन बने ।
  • सुखलाल सिंह चतरा – गिरिडीह विधान सभा क्षेत्र से 1936 ई. में विधायक निर्वाचित हुए |
  • भारत छोड़ो आंदोलन में सुखलाल सिंह 9 अगस्त, 1942 को गिरफ्तार हुए थे|
  • सुखलाल सिंह 1952 ई. के बिहार विधान सभा चुनाव में चतरा से विधायक चुने गये।
  • सुखलाल सिंह का निधन 9 जून, 1969 ई. को हुआ ।
 

बजरंग सहाय:-

 
  • राष्ट्रीय आंदोलन में गिरिडीह में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बजरंग सहाय ने निभाई।
  • बजरंग सहाय का जन्म 1 दिसम्बर, 1896 ई. को हुआ था ।
  • बजरंग सहाय का जन्म गिरिडीह जिले के चम्बा गांव में हुआ था ।
  • बिहार स्टूडेंट कॉन्फ्रेंस के 6 अक्टूबर, 1921 ई. को हजारीबाग में सम्पन्न 16वें अधिवेशन में उग्र भाषण देने के आरोप में बजरंग सहाय को गिरफ्तार होना पड़ा था ।
  • गिरिडीह में असहयोग आंदोलन के सबसे प्रमुख नेता बजरंग सहाय थे ।
  • गिरिडीह में नमक सत्याग्रह में बजरंग सहाय ने प्रभावी भूमिका निभाई थी।
  • 1942 ई. के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानेवाल बजरंग सहाय 18 दिसम्बर, 1962 को दुनिया से चल बसे ।
 

कृष्ण बल्लभ सहाय:-

  
  • बिहार के दूसरे झारखण्डी मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय का जन्म 31 दिसम्बर, 1898 ई. को हुआ था ।
  • कृष्ण बल्लभ सहायू के पिता का नाम बाबू गंगा प्रसाद था।
  • कृष्ण बल्लभ सहाय ने जिला स्कूल, हजारीबाग से मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की।
  • कृष्ण बल्लभ सहाय ने स्नातक की शिक्षा संत कोलम्बस कॉलेज, हजारीबाग से प्राप्त की ।
  • कृष्ण बल्लभ सहाय ने खजांची तालाब के निकट नमक बनाकर नमक कानून को चुनौती दी ।
  • बिहार के राजस्व मंत्री के रूप में कृष्ण बल्लभ सहाय ने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • कृष्ण बल्लभ सहाय 1963-67 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे ।
  • कृष्ण बल्लभ सहाय का निधन 3 जून, 1974 ई. को हुआ।

विनोदा नंद झा

  
  • बिहार के प्रथम झारखण्डी मुख्यमंत्री विनोदा नंद झा का जन्म 17 अप्रैल, 1900 के हुआ था ।
  • विनोदा नंद झा का जन्म देवघर में हुआ था ।
  • असहयोग आंदोलन के दौरान तीर्थनगरी देवघर मेंहिंदी विद्यापीठ की स्थापना करवाने में विनोदा नंद झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी ।
  • 1923 में गठित बिहार प्रांतीय स्वराज पार्टी के संथाल परगना का कार्यभार विनोदा नंद झा को सौंपा गया था ।
  • संथाल परगना में सविनय अवज्ञा आंदोलन की अगुवाई विनोदा नंद झा ने की ।
  • भारत छोड़ो आंदोलन में विनोदा नंद झा को जेल जाना पड़ा ।
  • भारत छोड़ो आंदोलन में देवघर में 11 अगस्त, 1942 को विनोदा नंद झा के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया था।
  • जयपाल सिंह ने नेतृत्व वाली झारखण्ड पार्टी का काँग्रेस में विलय करवाने में विनोदा नंद झा ने सक्रिय भूमिका निभाई।
  • विनोदा नंद झा 1961-63 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे ।
  • विनोदा नंद झा का निधन 9 अगस्त, 1971 ई. को हुआ।
 

जयपाल सिंह:-

  
  • अलग झारखण्ड राज्य आंदोलन के प्रणेता मारंग गोमके जयपाल सिंह का जन्म 3 जनवरी, 1903 को हुआ था ।
  • जयपाल सिंह का जन्म खूँटी जिले के टकरा गांव में हुआ था ।
  • जयपाल सिंह को बचपन का नाम वेन्नद्य पाहन था ।
  • ईसाई बनने के बाद जयपाल सिंह का नाम ईश्वर दास पड़ा ।
  • खूँटी के इनके पुरोहित जयपाल मिश्र ने इनका नामकरण जयपाल सिंह किया।
  • जयपाल सिंह के सांस्कृतिक गुरू सुकरा पाहन थे ।
  • संत पॉल स्कूल के प्राचार्य जयपाल सिंह को पुरोहित बनाने के उद्देश्य से 1919 ई. में इंग्लैड ले गये ।
  • जयपाल सिंह ने एम.ए. की परीक्षा ऑक्सफोर्ड से 1922 ई. में पास की।
  • 1928 के एम्सटर्डम ओलम्पिक में जयपाल सिंह की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने हॉकी का स्वर्ण पदक जीता था ।
  • जयपाल सिंह 1934 से 37 ई. तक डच कम्पनी को छोड़कर अचींमोट कॉलेज ऑफ कॉमर्स, गोल्डकॉस्ट, पश्चिम अफ्रीका में प्राध्यापक बने ।
  • जयपाल सिंह 1937 ई. में रायपुर के प्रिंस कॉलेज में सीनियर असिस्टेंट मास्टर फिर बाद में वाइस प्रिंसीपल बने ।
  • जयपाल सिंह बीकानेर में रेवेन्यू कमिश्नर बने और वर्मा सेल के मैनेजर भी बने ।
  • जयपाल सिंह आदिवासी महासभा के अध्यक्ष 1939 ई. में बने ।
  • वृहत्तर झारखण्ड की मांग सर्वप्रथम जयपाल सिंह ने की ।
  • 1950 ई. में स्थापित झारखण्ड पार्टी के संस्थापक जयपाल सिंह थे ।
  • जयपाल सिंह 1946 ई. में संविधान सभा के सदस्य बनाये गये ।
  • 20 जून 1963 को झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय के पश्चात विनोदा नंद झा की सरकार में जयपाल सिंह को सामुदायिक विकास एवं ग्राम पंचायत मंत्री बनाया गया ।
  • जयपाल सिंह का विवाह कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष व्योमेशचन्द्र बनर्जी की पुत्री तारा मजूमदार से हुआ था।
  • जहाँआरा जयपाल सिंह की द्वितीय पत्नी थी ।
  • मारंग गोमके तथा मुंडा राजा के नाम से जयपाल सिंह जाने जाते हैं ।
  • बिरसा मुंडा का अवतार जयपाल सिंह को माना जाता है|
  • जयपाल सिंह 1952-70 ई. तक खूँटी का सांसद बने रहे ।
  • जयपाल सिंह की मृत्यु 20 मार्च, 1970 को हुई ।
 

लानस नायक अल्बर्ट एक्का:-

 
  • अपनी वीरता के लिए विख्यात लान्स नायक अलबर्ट एक्का का जन्म 1942 ई. में हुआ था ।
  • अलबर्ट एक्का का जन्म गुमला जिले के जड़ी गांव में हुआ था ।
  • अलबर्ट एक्का के पिता का नाम जुलियस एक्का था ।
  • अल्बर्ट की माता का नाम मरियम एक्का था ।
  • अल्बर्ट एक्का की पत्नी का नाम बेलेडीना एक्का था ।
  • अल्बर्ट एक्का की पदोन्नति लान्स नायक के रूप में 1962 के भारत-चीन युद्ध में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के एवज में हुई।
  • भारतीय थल सेना के ‘ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स’ के लान्स नायक अल्बर्ट एक्का 1971 के भारत-पाक युद्ध में शुत्रुओं के हमलों को विफल करके मातृ भूमि की रक्षा करते हुए स्वयं शहीद हो गये ।
  • 3 दिसम्बर, 1971 को अल्बर्ट एक्का ने अंतिम सांस ली।
  • अल्बर्ट एक्का को मरणोपरांत परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया।

कार्तिक उरांव:-

  
  • झारखण्ड के प्रखर नेता कार्तिक उरांव का जन्म 29 अक्टूबर, 1924 को हुआ था।
  • कार्तिक उरांव का जन्म लिटाटोली (गुमला) में हुआ था ।
  • कार्तिक उरांव के पिता का नाम जबरा उरांव था ।
  • कार्तिक उरांव गुमला उच्च विद्यालय से 1942 ई. में मैट्रिक उत्तीर्ण हुए।
  • कार्तिक उरांव में 1948 में पटना साईंस कॉलेज से स्नातक की परीक्षा अभियांत्रिकी में पास की और 1950 से अभियंता की नौकरी की ।
  • कार्तिक उरांव रॉयल कॉलेज ऑफ साईंस एण्ड टेक्नोलॉजी, लंदन से एस. एस. सी. इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की ।
  • कार्तिक उरांव विश्व के सबसे बड़े परमाणु विद्युत संयंत्र हिमन्टले प्वाइंट के प्रमुख डिजायनरों में से एक थे |
  • कार्तिक उरांव की शादी 1950 ई. में सुमति उरांव के साथ हुई जो बाद में सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भी बनी ।
  • कार्तिक उरांव की तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लंदन में मुलाकात 9 जून,1959 को हुई ।
  • कार्तिक उरांव जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण पर विदेश की महत्वपूर्ण नौकरी छोड़कर भारत लौट आये थे|
  • कार्तिक उरांव ने भारत लौटने के पश्चात् एच.ई.सी. राँची में नौकरी की ।
  • कार्तिक उरांव सर्वप्रथम 1962 ई. में काँग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े जिसमें वो पराजित हुए ।
  • कार्तिक उरांव 1967, 1971 एवं 1980 में काँग्रेस के टिकट पर लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से विजयी रहे ।
  • कार्तिक उरांव केन्द्र में केन्द्रीय पर्यटन एवं नागरिक विमानन राज्य मंत्री के पद पर भी रहे ।
  • कार्तिक उरांव केन्द्रीय संचार मंत्री भी बने ।
  • कार्तिक उरांव गुमला के विशुनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं बिहार में मंत्री भी बने ।
  • कार्तिक उरांव के नेतृत्व में अखिल भारतीय आदिवासी परिषद की स्थापना 1968 ई. में हुई ।
  • कार्तिक उरांव का निधन 8 दिसम्बर, 1981 को हुआ ।
 

शिबू सोरेन:-

 
  • झारखण्ड आंदोलन के अग्रणी नेता दिशोम गुरू शिबू सोरेन का जन्म 1942 ई. में हुआ था।
  • शिबू सोरेन का जन्म नेमरा (रामगढ़) में हुआ था ।
  • शिबू सोरेन के पिता का नाम सोबरन मांझी था ।
  • शिबू सोरेन की माता का नाम सोनामनी था ।
  • शिबू सोरेन के पत्नी का नाम रूपी सोरेन है।
  • शिबू सोरेन का मूल नाम शिवचरण लाल मांझी था ।
  • शिबू सोरेन प्रारंभ में महाजनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई की ।
  • शिबू सोरेन द्वारा सोनोत संथाल समाज का गठन 1970 ई. में किया गया ।
  • चिरूडीह नरसंहार मामले में 1975 ई. में शिबू सोरेन को भगोड़ा घोषित किया गया ।
  • शिबू सोरेन पहली बार टुंडी विधान सभा क्षेत्र से चुनाव 1977 ई. में लड़े, जिसमें वे पराजित हुए ।
  • शिबू सोरेन पहली बार लोक सभा हेतु 1980 ई. में निर्वाचित हुए।
  • शिबू सोरेन दुमका लोक सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • शिबू सोरेन ने 1973 ई. में बिनोद बिहारी महतों के साथ मिलकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की नींव डाली और इसके संस्थापक महासचिव बने ।
  • शिबू सोरेन पहली बार झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष 1987 ई. में निर्वाचित किये गये ।
  • 1995 ई. में झारखण्ड क्षेत्र स्वायत परिषद (जैक) का गठन होने पर इसके प्रथम अध्यक्ष शिबू सोरेन बनाये गये ।
  • शिबू सोरेन ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में दो बार केन्द्रीय कोयला मंत्री का पद संभाला ।
  • शिबू सोरेन पहली बार झारखण्ड के मुख्यमंत्री 2 मार्च, 2005 को बने ।
  • शिबू सोरेन को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद तमाड़ विधान सभा क्षेत्र से उप चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा ।
  • शिबू सोरेन 2009 में तीसरी बार झारखण्ड के मुख्यमंत्री बने, बाद में इन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
  • शिबू सोरेन को शशिनाथ झा हत्याकांड के आरोप में जेल जाना पड़ा तथा उम्र कैद की सजा भी हुई थी । शशिनाथ झा शिबू सोरेन के निजी सचिव थे ।
 

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Jharkhand Gk in Hindi JSSC
jharkhand gk in hindi
 

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