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 1857 की महान क्रांति : कारण एवं नेता |The Great Revolution of 1857: Causes and Leaders.

 
 

क्रांति का कारण:

 

👉1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बी लगे कारतूस का प्रयोग था इस विद्रोह के अन्य मुख्य कारण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक थे।

 

1857 की महान क्रांति : कारण एवं नेता
1857 की महान क्रांति
 
 

 

A.आर्थिक कारण:-

 

1. अधिक राजस्व व्यवस्था

2. अधिक कराधान :– इसके कारण किसानों को अत्यधिक ब्याज दरों पर साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था।

3. ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय हथकरघा उद्योग को नुकसान पहुंचाया जिसेआधुनिक उद्योगों के साथ-साथ विकसित नहीं किया गया था।

4. अंग्रेजों का अत्यधिक हस्तक्षेप :-जमींदारों का वर्चस्व कम होना|

 

B.राजनैतिक कारण:-

 

1. सहायक संधि –—- लॉर्ड वेलेजली

2. व्यगपत सिद्धांत –— लॉर्ड डलहौजी

3. धार्मिक अयोग्यता अधिनियम 1856 –— धर्म परिवर्तन बच्चे को संपत्ति का वारिस बनने से नहीं रोकेगा।

 

C.सामाजिक आर्थिक कारण:

 

1. अंग्रेजों के स्वयं को अधिक श्रेष्ठ मानना।

2. इसाई मिशनरियों की गतिविधियां।

3. सामाजिक-धार्मिक सुधारों का होना जैसे :-सति प्रथा का अंत, विधवा पुनर्विवाह का प्रयास, महिलाओँ की शिक्षा का प्रयास आदि।

4. मस्जिदों और मंदिरों की जमीनों पर कब्जा करना|

 

D. प्रशासनिक कारण:-

 

1. कंपनी के प्रशासन में बहुत अधिक भ्रष्टाचार – अधिकतर निचले स्तर (पुलिस, निचले अधिकारियों) में।

2. भारत के विकास पर कोई ध्यान नहीं देना।

 

E.तात्कालिक कारण:-

 

1. सामान्य सेवा प्रवर्तन अधिनियम जिसके कारण भविष्य की भर्तियों को कहीं भी कार्य करने यहां तक की समुद्र पार कार्य करने का आदेश देना।

2. ब्रिटिश लोगों की तुलना में भारतीय लोगों को कम वेतन देना|

3. गेंहू के आटे में हड्डी का चूर्ण मिलाने की सूचना

4. एनफील्ड राइफल की कार्टिज गाय और सुअर की चर्बी से बनी थी।

 

➤समकालिक घटनाओं का प्रभाव:-

 

1. प्रथम अफ़गान युद्ध (सन् 1838-42)

2. पंजाब युद्ध (सन् 1845-49)

3. क्रीमिया का युद्ध (सन् 1854-46)

4. संथाल विद्रोह (सन् 1855-57)

 

➤क्रांति के महत्वपूर्ण तथ्य:-

 

👉29 मार्च 1857 को बैरकपुर के 34 वी नेटिव इन्फेंट्री के एक सैनिक मंगल पांडे ने गाय एवं सूअर की चर्बी मिले कारतूस को मुंह से काटने से स्पष्ट मना कर दिया था अतःउसे गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 ईस्वी को फांसी दे दी गई|

👉7वीं अवध रेजीमेंट को भी भंग कर दिया गया।

👉मेरठ में 10 मई को विद्रोह हो गया, विद्रोहियों ने अपने बंदी साथियों को आजाद किया, उनके अधिकारियों को मार दिया और सूर्यास्त के बाद दिल्ली के लिए निकल गए।

👉दिल्ली – महान क्रांति का केन्द्र

 

➤क्रांति के नेता :-

 

👉दिल्ली —- मुगल शासक बहादुरशाह जफ़र थे, लेकिन वास्तविक शक्ति सेनापति बख्त खां के हाथों में थी।

👉कानपुर —- नाना साहेब, तात्या टोपे, अजिमुल्लाह खान के नेतृत्व में विद्रोह हुआ।

तात्या टोपे दिन का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग झांसी की पराजय के बाद नेपाल चले गए| नाना साहेब ने खुद को पेशवा एवं बहादुर शाह को भारत का सम्राट घोषित कर दिया।

👉लखनऊ —-बेगम हजरत महल ने नेतृत्व किया और अपने पुत्र बिरजिस कादिर को नबाव घोषित कर दिया।

👉बरेली —-खान बहादुर

👉बिहार —-कुंवर सिंह, जगदीशपुर के जमींदार और फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह ने अपने क्षेत्रों में क्रांति का नेतृत्व किया।

👉झांसी—-रानी लक्ष्मीबाई,को गवर्नर लॉर्ड डलहौडी के व्यगपत सिद्धांत के कारण झांसी से बाहर कर दिया था, क्योंकि जनरल ने उनके दत्तक पुत्र को सिंहासन का उत्तराधिकारी स्वीकारने से मना कर दिया था।

 

 

 

➤क्रांति का दमन:-

 

👉20 सितम्बर 1857 को अंग्रेजों ने फिर से दिल्ली पर कब्जा कर लिया और जॉन निकोलसन इस घेरेबंदी के नेता थे।

👉बाहदुर शाह को बंदी बनाकर रंगून भेज दिया गया जहां सन् 1862 में उनकी मृत्यु हो गयी। लेफ्टिनेंट हडसन द्वारा शाही राजकुमारी की माथे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। दिल्ली के हारने के बाद, सभी स्थानीय क्रांतियों का दमन होता चला गया।

👉सर कोलिन कैम्पबेल ने कानपुर और लखनऊ पर फिर से कब्जा कर लिया।

👉बनारस में, कर्नल नील द्वारा विद्रोह का क्रूरतापूर्वक दमन किया गया।

 

➤क्रांति के असफल होने के कारण:-

 

👉बाहदुरशाह जफ़र बूढ़ा और कमजोर हो चुके थे, इस कारण से क्रांति का नेतृत्व करने में असमर्थ थे।

👉कई बड़े-बड़े जमींदारों ने अंग्रेजों का साथ दिया।

👉क्षेत्रों का विस्तार बहुत कम था।

👉भारतीय सिपाहियों के पास आधुनिक हथियार नहीं थे लगभग खराब हथियार थे।

👉भारत का अधिकांश भाग लगभग क्रांति के प्रभाव से अछूता रहा।

👉भारत के शिक्षित वर्ग ने क्रांति को विरोध के रूप में देखा।

👉क्रांति की तैयारियां भी अधूरी थी और क्रांति में अंग्रेजी शासन तंत्र की स्पष्ट समझ की कमी थी

 

➤1857 क्रांति किसने क्या कहा:-

 

👉वी.डी. सावरकर ने 1857 की क्रांति को ”प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ” कहा।

👉डॉ. एस. एन. सेन ने इसका वर्णन “सी लड़ाई जो धर्म के लिए शुरु हुई थी लेकिन स्वतंत्रता के युद्ध पर जाकर समाप्त हुई” के रूप में वर्णन किया है।

👉डॉ. आर. सी. मजूमदार ने इसे ”न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता का युद्ध” माना है।

👉 कुछ ब्रिटिश इतिहासकारों का मानना है की ”यह मात्र एक किसान सिपाही बगावतथा।

 

इन्हें भी पढ़ें:- 

  
FAQ:-

 

Q 1857 का विद्रोह कहां से प्रारंभ हुआ?—– मेरठ

Q 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण था?—- चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग आरंभ करना

Q लखनऊ शहर के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?—- बेगम हजरत महल

Q 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?—- लॉर्ड कैनिंग

Q 1857 के विद्रोह की शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण कारण कौन था?—– हिंदू मुस्लिम एकता

 

 

 

 

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