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मौर्य साम्राज्‍य का उदय और विस्‍तार|Rise and Expansion of the Mauryan Empire.

  

प्राचीन भारत का इतिहास : चंद्रगुप्त मौर्य

 

➤मौर्य साम्राज्‍य का उदय:-

 

👉मौर्य राजवंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी| चंद्रगुप्त ने चाणक्य की सहायता से नंद राजवंश को नष्ट कर दिया और मौर्य वंश का शासन स्थापित किया| बौद्ध परंपरा से पता चलता है कि नेपाल की तराई से लगे गोरखपुर में मौर्य नामक क्षत्रिय कुल के लोग रहते थे| संभवत है कि चंद्रगुप्त इसी वंश का था|

👉मौर्य साम्राज्‍य का आरंभ चंद्रगुप्‍त मौर्य द्वारा 321 ईसा पूर्व में मगध से हुआ। विशाखादत्‍त द्वारा रचित मुद्राराक्षस में चाणक्‍य की मदद से चंद्रगुप्‍त मौर्य के उदय का सुदंरता से चित्रण किया गया है। चंद्रगुप्‍त मौर्य जैन धर्म का अनुयायी था। पाटलिपुत्र, आधुनिक पटना मौर्य साम्राज्‍य की राजधानी थी।

 

 

 

➤मौर्य साम्राज्‍य का विस्‍तार:-

 

👉चंद्रगुप्त ने पश्चिमोत्तर भारत को सेल्यूकस की गुलामी से मुक्त करवा कर दोनों शासकों ने एक समझौता किया जिसमे सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त से 500 हाथी लेकर उसे पूर्वी अफगानिस्तान ,बलूचिस्तान और सिंधु के पश्चिम का क्षेत्र दे दिया|

👉इस संधि के परिणाम स्वरूप सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलेना का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य के साथ कर दिया| इस वैवाहिक संबंध का विस्तारपूर्वक उल्लेख केवल एपीयानस ने किया है|

मौर्य साम्राज्‍य उस समय के सबसे बड़े साम्राज्‍यों में से एक था और 5,000,000 वर्ग कि.मी से भी अधिक क्षेत्रफल में विस्‍तारित था। उत्‍तर-पूर्व भारत के हिस्‍सों, केरल और तमिलनाडु को छोड़कर मौर्यों ने शेष भारतीय उप-महाद्वीपों पर शासन किया था।

 

 

 

➤राजव्‍यवस्‍था:-

 

👉मेगस्‍थनीज़ की पुस्‍तक इंडिका और अर्थशास्‍त्र (कौटिल्‍य द्वारा लिखित) में मौर्य प्रशासन, समाज और अर्थव्‍यवस्‍था का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है।

👉साम्राज्‍य प्रांतों में विभाजित था, जिसका शासन राजकुमारों के हाथ में था। इसके साथ, 12 विभागों, सैन्‍य बलों में छह शाखाओं का भी उल्‍लेख किया गया है। चंद्रगुप्‍त ने एक सुव्‍यवस्थित प्रशासनिक तंत्र को स्‍थापित किया और एक ठोस वित्‍तीय आधार प्रदान किया।प्रांतों को जिला या निकाय में विभक्त किया गया था| जिला प्रशासन का प्रधान स्थानिक होता था जो समाहर्ता के नियंत्रण में कार्य करता था|

👉पाटलिपुत्र ,कौशांबी ,उज्जैनी और तक्षशिला प्रमुख नगर थे|

👉मौर्य की राजधानी पाटलिपुत्र का प्रशासन 6 समितियां करती थी | प्रत्येक समिति में 5-5 सदस्य होते थे| यह समितियां सफाई, विदेशियों की रक्षा, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण, बांटो और माप का नियमन तथा इस प्रकार के अन्य कार्य करती थी|

👉चंद्रगुप्त के प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता थी- विशाल एवं स्थाई सेना रखना|

कौटिल्य के अनुसार सेना चतुरंगिणी( पैदल, हाथी, घोड़े और रथ) थी| शिमांतो की रक्षा के लिए दुर्ग बनाए गए थे, जिसकी सुरक्षा दुर्गपाल और अंतपाल करते थे|

 

गुप्तचर विभाग:-

 

👉मौर्य साम्राज्य के गुप्तचर विभाग सुसंगठित था, इस विभाग मे गुप्तचर होते थे जो महामात्यापासर्प  के अधीन काम करते थे| साम्राज्य की सीमाओं के भीतर होने वाले लगभग सभी प्रकार के आर्थिक क्रियाकलापों पर राजकीय नियंत्रण था|

 

➤बिंदुसार (298 – 273 ईसापूर्व):-

 

👉बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था|

👉यूनानीयों ने इसे अमित्रघात कहा था और यह आजीवक सम्‍प्रदाय का अनुयायी था।

👉बिंदुसार की सभा 500 सदस्य वाली एक मंत्रिपरिषद थी जिसका प्रधान खल्लाटक था|

 

 

➤अशोक:-

 

👉अशोक मौर्य शासकों में सबसे महान शासक हुआ|

👉बौद्ध परंपरा के अनुसार वह अपने आरंभिक जीवन में अत्यंत क्रूर था तथा अपने 99 भाइयों की हत्या कर राजगद्दी पर बैठा था परंतु कुछ इतिहासकार इसे किवदंती मानते हैं|

👉अशोक 273 ईसा पूर्व में सिंहासन प्राप्त किया परंतु 4 वर्ष तक गृह युद्ध में रहने के कारण अशोक का वास्तविक राज्य अभिषेक 269 ईसवी पूर्व में हुआ और 232 ई.पू. तक शासन किया। इसे ‘देवप्रिय प्रियदर्शी’ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ था-ईश्‍वर का प्‍यारा

👉अशोक ने 261 ईसापूर्व में कलिंग का युद्ध लड़ा। कलिंग अब उड़ीसा में है।

👉अशोक के शिलालेखों को सबसे पहले जेम्‍स प्रिंसेप ने पढ़ा था।

👉कलिंग के युद्ध के पश्‍चात, अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया, युद्ध के आंतक से विचलित होकर, उसने बेरीघोष की जगह धम्‍मघोष मार्ग अपनाया।

👉अशोक को बौद्ध धर्म का ज्ञान बुद्ध के एक शिष्‍य उपगुप्‍त या निग्रोध ने दिया था।

👉बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने धर्ममहामात्रों को नियुक्‍त किया।

 

➤अशोक के शिलालेख:-

 

👉अशोक प्रथम भारतीय सम्राट हुआ , जिसने अपनी अभिलेखों की सहायता से सीधे अपनी प्रजा को संबोधित किया|

👉गुर्जरा, मास्की , नेट्टूर, उदगोलम अभिलेख पर अशोक का वास्तविक नाम मिलता है अन्य सभी अभिलेखों में केवल देवनाम्प्रिया उसकी उपाधि के रूप में मिलता है|

👉अशोक के 14 मुख्‍य शिलालेख धर्म सिद्धांत के बारे में बताते हैं।

कलिंग शिलालेख कलिंग युद्ध के बाद प्रशासन के सिद्धांत की व्‍याख्‍या करता है। अपने कलिंग शिलालेख में, इसने जिक्र किया है ‘सभी मनुष्‍य मेरे बच्‍चे हैं’।

👉अशोक के मुख्‍य शिलालेख 13 में कलिंग युद्ध का जिक्र किया गया है।

👉‘अशोक’ का सर्वप्रथम उल्‍लेख केवल मास्‍की लघु शिलालेख में हुआ है।

 

➤अशोक और बौद्ध धर्म:-

 

👉कलिंग युद्ध के परिणाम स्वरूप अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया, पौधों को अपार दान दिया और बौद्ध स्थलों की यात्रा की उसकी इस यात्रा का संकेत उसके अभिलेखों में आए धाम यात्रा शब्द से भी मिलता है|

👉अशोक ने बौद्ध धर्म का तीसरा सम्मेलन आयोजित करवाया और धर्म प्रचारकों को केवल दक्षिण भारत ही नहीं बल्कि श्रीलंका वर्मा आदि देशों में भी भेजा|

👉अशोक का धर्म संकुचित नहीं था| इसका उद्देश्य था कि, लोग माता-पिता की आज्ञा मानी, ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुऔ का आदर करें तथा दासो और सेवकों के प्रति दया करें अशोक ने लोगों को ‘जियो और जीने दो’ का पाठ है|

👉 उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्‍द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।

👉अशोक ने श्रीलंका और नेपाल में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। इसे बौद्ध धर्म के कोंसटेटाइन कहा जाता है।

👉श्रीलंका के शासक देवमप्रिय तिस्‍स अशोक के प्रथम बौद्ध धर्म धर्मांतरण थे।

👉 अशोक की धम्‍म नीति का व्‍यापक उद्देश्‍य सामाजिक व्‍यवस्‍था को बनाए रखना था।

👉अशोक ने 40 वर्षों तक शासन किया और 232 ईसापूर्व में इसकी मृत्‍यु हो गई।

 

➤मौर्य प्रशासन:-

 

👉कौटिल्य ने राजा को धर्मप्रवर्तक अर्थात सामाजिक व्यवस्था का संचालक कहां है|प्राचीन इतिहास के किसी अन्य काल मे हम इतने अधिक अधिकारियों का उल्लेख नहीं पाते, जितने मौर्य काल में | सबसे शीर्ष अधिकारी तीर्थ कहलाते थे| उच्चतम कोटी के अधिकारी मंत्री, पुरोहित, सेनापति और युवराज आदि थे|

👉अत्‍यधिक केन्‍द्रीयकृत प्रशासनिक ढांचा। चाणक्‍य ने प्रशासन में सप्‍तांग सिद्धांत के 7 तत्‍वों का जिक्र किया है। राजा को मंत्रिपरिषद द्वारा सलाह दी जाती थी। विभिन्‍न प्रशासनिक क्रियाकलापों के लिए महत्‍वपूर्ण अधिकारी नियुक्‍त किए जाते थे।

 

आर्थिक नियंत्रण:-

 

👉 राज्य में 27 अध्यक्ष नियुक्त थे ,जिनका कार्य मुख्य रूप से राज्य की आर्थिक गतिविधियों का नियमन करना था|

👉वे कृषि, व्यापार- वाणिज्य, और बाट-माप ,कताई , बुनाई, खान आदि उद्योगों का नियमन-नियंत्रण करते थे|

👉मौर्य काल में सभी प्रकार की फसलों का उत्पादन होता था| अर्थशास्त्र में धान की फसल को सर्वोत्तम माना गया है| गन्ने की फसल को निक्रष्टम  माना गया है| कौटिल्य के अर्थशास्त्र में 1 वर्ष में 3 फसलों के उपजाए जाने का वर्णन मिलता है|

👉मौर्य काल में दासो को कृषि कार्यों में बड़े पैमाने पर लगाया जाता था |

 

वास्तुकला:-

 

👉 कला और वास्तुशिल्प में मौर्यों का योगदान बहुत ही रहा है| पत्थर से इमारत बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर उन्होंने ही आरंभ किया था|

👉इसका सबसे बड़ा उदाहरण बराबर की गुफाएं हैं, जो गया से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| यह बौद्ध भिक्षुओं के निवास के लिए चट्टानों को काटकर गुफाएं बनाने की परंपरा की गई थी|

👉भारतीय गणराज्‍य के प्रतीक को अशोक स्‍तंभ के चार शेरों से लिया गया है, जो सारनाथ में स्थित है। सांची से अन्‍य चार शेर, रामपुरवा और लौरिया नन्‍दनगढ़ से एक शेर और रामपुरवा से एक बैल और धौली में नक्‍काशीदार हाथी पाए जाते हैं।

👉मौर्यों ने व्‍यापक स्‍तर पर पत्‍थर राजगिरी की शुरुआत की थी। इन्‍होंने चट्टानों को खोदकर गुफाएं बनाने की शुरूआत की और बुद्ध और बोधिसत्‍व के पुरावशेष संग्रहित करने के लिए स्‍तूपों का निर्माण किया जिसका बाद में गुप्‍त वंश द्वारा विस्‍तार किया गया था।

 

 

 

➤पतन का कारण:-

 

👉आर्थिक कारण—-सेना और प्रशासनिक अधिकारियों पर होने वाले अत्यधिक खर्च के बोझ  से मौर्य साम्राज्य के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया |

👉अशोक ने बौद्ध भिक्षुओं को इतना दान दिया कि राजकोष लगभग खाली हो गया|

👉अंतिम अवस्था में खर्च को पूरा करने के लिए मौर्यों को सोने की देव-प्रतिमाएं तक गलानी पड़ी|

👉धार्मिक नीति( ब्राह्मण विरोधी नीति के कारण)

👉अहिंसक एवं शांतिप्रिय नीति

👉कमजोर उत्तराधिकारी(अशोक की मृत्‍यु के बाद विभाजन ने साम्राज्‍य की एकता में फूट डाल दी )

👉केंद्रीय प्रशासन(अत्‍यधिक केन्‍द्रीयकृत मौर्य प्रशासन)

👉अधिकारी तंत्र का प्रशिक्षित होना

 

 

 

इन्हें भी पढ़ें:- 

 

 

FAQ:-

 

  • Q चाणक्य का अन्य नाम क्या है?—– विष्णुगुप्त
  • Q बिंदुसार ने विद्रोहियों को कुचलने के लिए अशोक को कहां भेजा था?—- तक्षशिला
  • Q देवनाम प्रियदर्शी किसे कहा जाता है?—- अशोक
  • Q कलिंग युद्ध के उपरांत अशोक ने कौन सा धर्म अपनाया?—- बौद्ध
  • Q मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की?—- चंद्रगुप्त मौर्य
  • Q मौर्य साम्राज्य की प्रचलित मुद्रा का नाम क्या है?—- पण 
  • Q अशोक का उत्तराधिकारी कौन था?—- कुणाल
  • Q मुद्राराक्षस के लेखक कौन है?—- विशाखदत्त
  • Q कौटिल्य के अर्थशास्त्र में किस पहलू पर प्रकाश डाला गया है?—- राजनीतिक नीतियां
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